मन से धन की ओर
📘 पुस्तक का नाम: मन से धन की ओर लेखक: प्रवीण कुमार मोबाइल नंबर: 9794054209 प्रस्तावना हर व्यक्ति के भीतर एक अमीर बनने की गहरी इच्छा होती है, लेकिन बहुत कम लोग इस राह पर चल पाते हैं। अमीरी केवल मेहनत या अवसरों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह हमारे सोचने के तरीके, आत्मविश्वास, और मानसिकता का खेल है। यह पुस्तक आपको मानसिकता से लेकर कार्यों तक, विचारों से लेकर व्यवहार तक, एक सम्पूर्ण रूपांतरण की दिशा में ले जाएगी। अध्याय 1: सोच का धन से रिश्ता “जैसा आप सोचते हैं, वैसा ही आपका भविष्य बनता है।” 1.1 सोच ही बीज है हमारे मन की सोच वह बीज है जिससे हमारे जीवन का वृक्ष तैयार होता है। अगर आप खुद को निर्धन, कमजोर, या असहाय मानते हैं, तो आपकी ऊर्जा और निर्णय भी उसी अनुसार होंगे। उदाहरण: रमेश नाम का एक व्यक्ति रोज़ सोचता था कि "मैं कभी अमीर नहीं बन सकता"। वह अच्छे मौके आने पर भी डर जाता और उन्हें खो देता। वहीँ सुरेश सोचता था, "मुझे एक मौका चाहिए, मैं उसे सोना बना दूँगा", और वही हुआ। 1.2 सोच को बदलना क्यों जरूरी है? सोच बदलते ही दृष्टिकोण, आत्मबल और निर्ण...